Bengaluru की रातें हमेशा से कुछ अलग महसूस होती थीं। खासकर बारिश के मौसम में। सड़कें पानी से चमकने लगतीं, कैफ़े की लाइट्स और खूबसूरत दिखने लगतीं और ठंडी हवा दिल के अंदर तक उतर जाती। उसी शहर में रहने वाला करण उस रात अपने ऑफिस से बहुत देर से निकला था। पूरा दिन काम में गुजर गया था और उसका मूड भी थोड़ा खराब था।
बारिश लगातार हो रही थी। करण अपनी कार धीरे-धीरे चला रहा था तभी उसकी नजर सड़क किनारे खड़ी एक लड़की पर पड़ी। लड़की ने ब्लैक ड्रेस पहन रखी थी और बारिश से बचने के लिए एक छोटे-से शेड के नीचे खड़ी थी। उसके गीले बाल चेहरे से चिपके हुए थे और वह बार-बार अपने फोन में कुछ देखने की कोशिश कर रही थी।
करण ने कार उसके पास रोकी और शीशा नीचे करके पूछा, “क्या तुम्हें कहीं ड्रॉप चाहिए?”
लड़की ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखें बेहद खूबसूरत थीं। कुछ पल सोचने के बाद वह हल्का-सा मुस्कुराई और बोली, “अगर तुम्हें परेशानी न हो तो…”
“बिल्कुल नहीं,” करण ने तुरंत जवाब दिया।
लड़की कार में बैठ गई। अंदर हल्की कॉफी और परफ्यूम की खुशबू फैली हुई थी। उसने अपने बाल पीछे करते हुए कहा, “वैसे मेरा नाम सिया है।”
“करण,” उसने मुस्कुराकर कहा।
कार में धीमा रोमांटिक म्यूजिक चल रहा था। बाहर बारिश की बूंदें शीशों पर गिर रही थीं और अंदर दोनों के बीच एक अजीब-सी खामोशी थी। लेकिन वह खामोशी असहज नहीं थी। दोनों बार-बार एक-दूसरे को देख रहे थे।
कुछ देर बाद सिया हंसते हुए बोली, “तुम बहुत कम बोलते हो।”
करण ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, “शायद इसलिए क्योंकि तुम्हें देखकर शब्द कम पड़ रहे हैं।”
सिया उसकी बात सुनकर हल्का-सा शरमा गई। उसने खिड़की के बाहर देखा, लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान साफ बता रही थी कि उसे करण की बात अच्छी लगी।
ट्रैफिक बहुत ज्यादा था। सड़कें लगभग जाम हो चुकी थीं। तभी सिया ने सामने एक रूफटॉप कैफ़े की तरफ इशारा करते हुए कहा, “क्या थोड़ी देर वहां रुक सकते हैं? इतनी बारिश में सफर और लंबा हो जाएगा।”
करण ने हामी भर दी।
दोनों कैफ़े में जाकर बैठ गए। ऊपर से पूरा बैंगलोर चमक रहा था। हल्की बारिश अब भी जारी थी। ठंडी हवा बार-बार सिया के बालों को उसके चेहरे पर ला रही थी। करण की नजरें अनजाने में उसी पर टिक जा रही थीं।
कॉफी के कप के बीच धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं। पहले काम की, फिर जिंदगी की और फिर उन एहसासों की जिनके बारे में लोग हर किसी से बात नहीं करते। सिया जब हंसती तो करण कुछ पल बस उसे देखता रह जाता।
“इतना क्या देख रहे हो?” सिया ने मुस्कुराते हुए पूछा।
करण धीरे से बोला, “तुम्हें।”
दोनों कुछ सेकंड तक बस एक-दूसरे को देखते रहे। बारिश की आवाज और धीमा म्यूजिक उस पल को और खास बना रहे थे।
रात काफी आगे बढ़ चुकी थी, लेकिन दोनों में से किसी का भी वहां से जाने का मन नहीं था। सिया धीरे-धीरे उसके और करीब आ चुकी थी। कभी उसका हाथ करण के हाथ को छू जाता, कभी वह बात करते-करते उसकी आंखों में खो जाती। उनके बीच की केमिस्ट्री अब साफ महसूस हो रही थी।
कुछ देर बाद दोनों कैफ़े से बाहर निकले। बारिश अब हल्की हो चुकी थी। सड़कें लगभग खाली थीं। वे धीरे-धीरे चलते हुए कार तक पहुंचे। ठंडी हवा में सिया अचानक रुक गई और करण की तरफ देखकर बोली, “अजीब है ना… कुछ लोग पहली मुलाकात में ही इतने अपने लगने लगते हैं।”
करण मुस्कुराया। “शायद कुछ रातें खास लोगों के लिए ही बनती हैं।”
सिया उसके बेहद करीब आ गई। दोनों की धड़कनें तेज हो चुकी थीं। उस पल में शब्दों की जरूरत नहीं थी। सिर्फ एहसास थे, बारिश थी और बैंगलोर की वो खूबसूरत रात।
सुबह होने लगी थी। आसमान हल्का नीला दिखने लगा। सिया ने कार की खिड़की से बाहर देखते हुए धीरे से कहा, “मुझे नहीं लगता मैं ये रात कभी भूल पाऊंगी।”
करण ने उसकी तरफ देखकर जवाब दिया, “मैं भी नहीं।”
उस रात की शुरुआत एक अजनबी मुलाकात से हुई थी, लेकिन खत्म होते-होते दोनों के दिल एक-दूसरे के बेहद करीब आ चुके थे।

